ट्रेन आई। दोनों चढ़े। उस दिन आरव ने हिम्मत जुटाई। "मैं आरव," उसने कहा।
एक दिन बारिश ने पूरे मुंबई को भिगो दिया। ट्रेनें लेट थीं, प्लेटफॉर्म गीले थे, और लोग परेशान थे। आरव हमेशा की तरह खड़ा था, तभी उसने देखा—वह लड़की दौड़ती हुई आ रही थी, लेकिन उसका पैर फिसल गया। उसकी किताब गीले फर्श पर गिर गई, और वह खुद भी लगभग गिर ही गई थी कि आरव ने उसका हाथ पकड़ लिया।
"कोई बात नहीं," लड़की ने किताब लेते हुए कहा, "किताबें सूख जाती हैं, लेकिन कुछ पल नहीं। यह पल नहीं भूलूंगी।" Hindi Sex Story in girls voice very sexy part 5 target
आरव ने मुस्कुराकर कहा, "क्योंकि तुम सिर्फ गिरने वाली थीं, मीरा। तुम नहीं जानतीं, लेकिन मैं तुम्हें रोज़ देखता था। मेरी शाम तुम्हारे बिना अधूरी थी।"
मुंबई की उस भीड़भाड़ वाली लोकल ट्रेन में हर रोज़ हज़ारों चेहरे आते-जाते थे, लेकिन आरव की नज़र सिर्फ एक चेहरे पर टिकती थी। प्लेटफॉर्म गीले थे
मीरा ने ऊपर देखा। आरव एक घुटने पर बैठा था, उसके हाथ में एक छोटा-सा डिब्बा था। अंदर एक अंगूठी थी।
वह लड़की, जिसके हाथ में हमेशा एक पुरानी सी किताब होती थी, आरव के सामने वाले डिब्बे में चढ़ती। उसके लंबे बाल अक्सर उसके चेहरे पर आ जाते, और वह उन्हें बार-बार हटाती। आरव ने उसका नाम 'किताब वाली लड़की' रख दिया था। वह उसका नाम तक नहीं जानता था, लेकिन उसकी शाम उसके बिना अधूरी लगती। "किताबें सूख जाती हैं
"बारिश की एक बूंद ने हमें गिरने से बचाया, और हम एक-दूसरे में बस गए। क्या तुम मेरी किताब का अगला अध्याय बनोगी, हमेशा के लिए?"